ग्राहक संरक्षण पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय ग्राहक सम्मेलन से भारत के ग्राहक संघठन नदारद

भारत के सबसे बड़े ग्राहक संगठन अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के पूर्व राष्ट्रीय सचिव अशोक त्रिवेदी ने इस सम्बन्ध में प्रधानमंत्री की आलोचना करते हुए कहा कि भारत के लिए यह स्वर्ण अवसर था

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज यहां कहा कि नवीन भारत की अवधारणा के अनुरूप सरकार ग्राहक संरक्षण को प्राथमिकता दे रही है। आगे चलकर हम इसे ग्राहक समृद्धि के साथ जोड़ देंगे। वह आज यहां पूर्व, दक्षिण तथा दक्षिण पूर्व एशिया के देशों के ग्राहक संरक्षण पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में बोल रहे थे। इस प्रकार का सम्मेलन पहली बार भारत में हो रहा है। इस सम्मेलन में 22 देश भाग ले रहे हैं, जो दुनिया के बहुसंख्यक ग्राहकों का प्रतिनिधत्व करते हैं। दो दिन के सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा घोषित ग्राहक संरक्षण दिशा निर्देशों के अनुरूप छ सत्र होंगे जिनमें दुनिया के विभिन्न देशों से आये विशेषज्ञ विषय रखेंगे। प्रधानमंत्री द्वारा भारत में ग्राहक सरंक्षण कानून और प्रशासनिक व्यवस्था में अधिक पैनापन लाने की बात भी इस अवसर पर कही गई ।

 

भारत के सबसे बड़े ग्राहक संगठन अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के पूर्व राष्ट्रीय सचिव अशोक त्रिवेदी ने इस सम्बन्ध में प्रधानमंत्री की आलोचना करते हुए कहा कि भारत के लिए यह स्वर्ण अवसर था, जब वह दुनिया को ग्राहक संरक्षण का सही मार्ग दिखा सकता था, जिन नीतियों का संयुक्त राष्ट्र संघ व दुनिया के दूसरे देशों को भी लाभ मिलता।  परन्तु नरेन्द्र मोदी ने यह मौका खो दिया है। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय की अन्तिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक आवश्यक न्यूनतम सुविधाओं को पहुंचाने की नीतियों को छोड़कर, पश्चिम की नीतियों को अपनाना बेहतर समझा। त्रिवेदी ने कहा कि दुनियाभर के देश ग्राहक आंदोलन के नाम पर सिर्फ कानून बनाने के पीछे भाग रहे हैं। आज मोदी भी वही कानून बनाने की बात कर रहे हैं। जबकि समय की मांग है। ग्राहक जैसे अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण घटक को अर्थव्यवस्था में यथोचित सहभागिता देने की जरूरत है, यह भारत का ग्राहक आंदोलन है, जिसे विश्व के सामने ले जाने और समझाने की आज आवश्यकता है।

ग्राहक आन्दोलन से पिछले 30 सालों से जुड़े ग्राहक पंचायत के पूर्व राष्ट्रीय सचिव ने आगे कहा।  सरकार को चाहिए था कि सम्मेलन आयोजित करने से पहले अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत जैसे संघठन से विस्तृत चर्चा कर  लेती।  जिसने विषय का गहन अध्ययन करने के साथ इस विषय में पर्याप्त अनुसंधान भी किया है, तो इस विषय पर विश्व के सामने ग्राहक आंदोलन का भारतीय दॄष्टिकोण जाता, जो दुनियाभर के ग्राहकों की न्यूनतम आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ साथ, दुनियाभर में बढ़ती जा रही आर्थिक असमानता को रोकने के लिए आवश्यक है।  भारत सरकार ने यह बेहतरीन मौका खो दिया है।  जिसका देश के सबसे बड़े ग्राहक संघठन को अफ़सोस है।

 

इंडिया संवाद से प्रकाशित

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